खाने-पीने की किसी भी खाद्य सामग्री का लैब में परीक्षण करवाएं, अगर परीक्षण में कुछ भी गलत साबित हुआ तो आपको रिफंड मिलेगा।

खाने-पीने की किसी भी खाद्य सामग्री का लैब में परीक्षण करवाएं, अगर परीक्षण में कुछ भी गलत साबित हुआ तो आपको रिफंड मिलेगा।

फूड लेबोरेटरी

सरकार ने खाद्य सुरक्षा पर एक बड़ा फैसला किया है, जो उपभोक्ताओं के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है, अब उपभोक्ता लैब में किसी भी खाद्य सामग्री का परीक्षण करवा सकता हैं। यदि आपके परीक्षण में दिये गए नमूने में कुछ भी गलत साबित होता है, तो परीक्षण के लिए आपसे लि गई धन राशि आपको वापस कर दि जाएगी। कुछ समय पहले, परीक्षण में दी जाने वाली भोजन सामग्री परीक्षण में खरा नहीं उत्तर पाती थी, तो ग्राहक को उस नमूने के परीक्षण में लगाई गई धन राशि वापस नहीं मिलती थी।

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) का कहना है कि इस सुविधा से खाने-पीने वाली सामग्रीयो की गुणवत्ता में सुधार होगा। FSSAI कहना है कि कोई भी व्यक्ति इस प्रकार का परीक्षण करवा सकता है, लेकिन उसे यह परीक्षण किसी उपभोक्ता संगठन के माध्यम से करना होगा।

हमारे यहाँ, अक्सर लोगों को खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता को लेकर शिकायत होने के बावजूद जांच नहीं करवा पाते है। इसका मुख्य कारण परीक्षण का लागत है। प्रशासनिक प्रणाली का मानना ​​है कि पैसे वापस पाने की इस सुविधा के साथ, लोग भोजन के नमूने की जांच करने हेतु आगे आएंगे।

केटल फील्ड

अगर आप रोजाना दूध और दूध से बनी चीजों का सेवन कर रहे हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। क्योंकि इस साल के मिल्क सर्वे ऑफ इंडिया में बड़ी बड़ी कंपनियों के दूध में एंटीबायोटिक, एफलाटॉक्सिन एम -1, कीटनाशक, भारी धातु और अन्य रसायनों की मिलावटो के कुछ मामले सामने आए हैं। जिसके बाद FSSAI ने दूध और उससे जुड़े सभी के लिए एक नया Milk Standard  बनाया हैं। FSSAI ने नए केटल फीड मानकों को भी बनाया है। जिसमें हर केटल फीड में BIS मार्क वाले चारे का उपयोग करना होगा। यहाँ FSSAI का कहना है कि खराब चारे के वजह से दूध में तरह तरह के रसायन पाए गए हैं।

BIS युक्त चारा

FSSAI क्या है?
FSSAI का पूरा नाम Food Safety and Standards Authority of India (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) हैं। जिसे 2011 में स्थापित किया गया। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

FSSAI क्या करता हैं?
इसका उद्देश्य खाद्य सामग्री के लिये विज्ञान पर आधारित मानकों का निर्माण करना तथा खाद्य पदार्थों के विनिर्माण, भण्डारण, वितरण, विक्री तथा आयात आदि को नियन्त्रित करना है ताकि मानव-उपभोग के लिये सुरक्षित तथा सम्पूर्ण आहार की उपलब्धि सुनिश्चित की जा सके।

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